जिलाधिकारी द्वारा की जा रही इतनी कोशिशों के बावजूद गोशालाओं में क्यों दम तोड़ रही हैं गायें?*

 *जिलाधिकारी द्वारा की जा रही इतनी कोशिशों के बावजूद गोशालाओं में क्यों दम तोड़ रही हैं गायें?*



*आवारा और छुट्टा पशुओं के लिए यातना गृह बनी गोशालाए*

सुभाष तिवारी लखनऊ

अंबेडकरनगर

गोशालाओं में सर्दी से गोवंशों को बचाने के लिए जिलाधिकारी ने सभी ब्लाक अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए थे। निर्देश के बाद कई ब्लाकों की गोशालाओं की स्थिति में सुधार हुआ। 

ज़िले के बसखारी विकासखंड के उमरापुर मीनापुर में ऐसे ही एक आश्रय स्थल में गोवंश पड़े है जहां न तो उनके लिए हरे चारे का. गोवंश के आगे हरे चारे के नाम पर कुछ मात्रा में भूसा डाल दी गई थी.गांव के कुछ लोगों का ये भी कहना था कि गोवंश आए दिन दम तोड़ रहे हैं और गौशालाओं में जब भी कोई जांच करने के लिए आता है तो गांव से लाकर गायें वहां रख दी जाती हैं और बाद में उन्हें फिर छोड़ दिया जाता है. ये अलग बात है कि गायों की रखवाली के लिए दो लोग वहां तैनात है।पशुपालन विभाग के एक बड़े अधिकारी नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं, "कुछ जगहों पर प्रशासनिक सख़्ती के बाद आश्रय स्थलों में पशु तो पहुंचा दिए गए लेकिन गोवंशो के लिए हरे चारे ही पर्याप्त व्यवस्था नहीं है तो गोशाला के कर्मचारी भी सोचते हैं कि मरने की बजाय इन्हें खुला ही छोड़ दिया जाए."

जिलाधिकारी सैमुअल पॉल एन द्वारा किए जा रहे अथक प्रयास के बाद भी विभाग के उच्च अधिकारी और कर्मचारियों द्वारा उनकी मंशा पर पानी फेरा जा रहा है।

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